नमस्कार । मैं ज्योति कक्कड़ learn till the end के आठवें एपिसोड के साथ जिस विषय पर बात करने आई हूँ वह है हमारी मनःस्थिति। जो समय और परिस्थिति के अनुसार बदलती रहती है।हमारे मन में विचार आते जाते रहते हैं। कभी सकारात्मक ,कभी नकारात्मक।
ईश्वर ने संसार बहुत सुंदर बनाया है।आसमान की तरफ़ उगते सूरज को देखें ।आप ईश्वर का आशीर्वाद अनुभव करेंगे। सुबह की ताज़ी हवा,तरह तरह की चिड़ियों की आवाज़ें, लहराते पेड़ सब कुछ तो बहुत अच्छा है फिर इंसान का दिमाग़ और दिल इतना कॉम्प्लिकेटेड क्यों बनाया।अगर ये सही काम कर रहे हैं तो सब तरफ़ ईश कृपा अनुभव होती है ।ये दुनिया, ये प्रकृति,ये हमारा जीवन सब कुछ आनंद दायक अनुभव होता है। पर हम इंसान अपनी बुरी सोच , छोटी बुद्धि ,कड़वी बोली या करमों से इसी अपने जीवन में और आसपासके लोगों में नकारात्मकता भर देते है और तब कुछ भी सुन्दर नहीं दिखता।वही हरियाली, वही सूर्योदय, वही घर ,ईश कृपा से प्राप्त सुख हम अनुभव नहीं करते क्योंकि हमारा मन कुछ भी सही नहीं सोच रहा ।दिल दिमाग़ नकारात्मकता से भरे हैं।अच्छे विचार जाने कहाँ गये।हम अपने विचारों को झटकते हैं पर वो कहीं नहीं जाते । हमारे मन की शांति , खुश मिज़ाजी कहीं चली गई।
ध्यान लगाने की कोशिश करें तो नकारात्मक सोच हमको ये भी नहीं करने देती।कहते हैं विचार आने दो, जाने दो और फिर विचारशून्य हो जाओ ।पर जब हम नकारात्मक सोच में हैं तो विचार आ रहे हैं ,जा नहीं रहे। और जो आ रहे हैं वो आपको अशांति दे रहे हैं।कहते हैं ध्यान की चरम अवस्था आपको विचार शून्य कर देती है पर वो तभी होगा जब हम शांत अवस्था में हों। ध्यान में जब हम केवलईश कृपा को महसूस करें । जो जीवन में मिला है ,सुख , दुख या कठिन परिस्थिति उसका समभाव से, धैर्य से सामना करना है।ईश्वर से उस कठिन परिस्थिति का सामना करने की हिम्मत माँगिये।आपा खोने से कुछ समाधान नहीं निकलेगा ।केवल जो हमारे हाथ में है हम वही कर सकते हैं। ईश्वर की मर्ज़ी के आगे झुकना ही होगा।हम उससे शिकायत नहीं कर सकते।सकारात्मक विचारों से हमे अपने जीवन में शांति रखनी होगी।आशा है कि इन विचारों से आप सहमत होंगे। इस आशा के साथ कि सभी प्राणी सकारात्मक विचारों से अपने जीवन में शान्ति रखें, मिलते हैं जल्दी ही किसी अन्य जीवन उपयोगी विषय के साथ । तब तक के लिए खुश रहें, सकारात्मक रहें और ईश कृपा को नमन करें। धन्यवाद।ओम शान्ति।
