बुधवार, 17 जून 2026

मन की शान्ति

नमस्कार । मैं ज्योति कक्कड़ learn till the end के आठवें एपिसोड के साथ जिस विषय पर बात करने आई हूँ वह है हमारी मनःस्थिति। जो समय और परिस्थिति के अनुसार बदलती रहती है।हमारे मन में विचार आते जाते रहते हैं। कभी सकारात्मक ,कभी नकारात्मक। 

ईश्वर ने संसार बहुत सुंदर बनाया है।आसमान की तरफ़ उगते सूरज को देखें ।आप ईश्वर का आशीर्वाद अनुभव करेंगे। सुबह की ताज़ी हवा,तरह तरह की चिड़ियों की आवाज़ेंलहराते पेड़ सब कुछ तो बहुत अच्छा है फिर इंसान का दिमाग़ और दिल इतना कॉम्प्लिकेटेड क्यों बनाया।अगर ये सही काम कर रहे हैं तो सब तरफ़ ईश कृपा अनुभव होती है ।ये दुनिया, ये प्रकृति,ये हमारा  जीवन सब कुछ आनंद दायक अनुभव होता है। पर हम इंसान अपनी बुरी सोच , छोटी बुद्धि ,कड़वी बोली या करमों से इसी अपने  जीवन में और आसपासके लोगों में नकारात्मकता भर देते है और तब कुछ भी सुन्दर नहीं दिखता।वही हरियालीवही सूर्योदयवही घर ,ईश कृपा से प्राप्त सुख हम अनुभव नहीं करते क्योंकि हमारा मन कुछ भी सही नहीं सोच रहा ।दिल दिमाग़ नकारात्मकता से भरे हैं।अच्छे विचार जाने कहाँ गये।हम अपने विचारों को झटकते हैं पर वो कहीं नहीं जाते । हमारे मन की शांति , खुश मिज़ाजी कहीं चली गई। 

ध्यान लगाने की कोशिश करें तो नकारात्मक सोच हमको ये भी नहीं करने देती।कहते हैं विचार आने दोजाने दो और फिर विचारशून्य हो जाओ ।पर जब हम नकारात्मक सोच में हैं तो विचार  रहे हैं ,जा नहीं रहे। और जो  रहे हैं वो आपको अशांति दे रहे हैं।कहते हैं ध्यान की चरम अवस्था आपको विचार शून्य कर देती है पर वो तभी होगा जब हम शांत अवस्था में हों। ध्यान में जब हम केवलईश कृपा को महसूस करें  जो जीवन में मिला है ,सुख , दुख या कठिन परिस्थिति उसका समभाव से, धैर्य से सामना करना है।ईश्वर से उस कठिन परिस्थिति का सामना करने की हिम्मत माँगिये।आपा खोने से कुछ समाधान नहीं निकलेगा ।केवल जो हमारे हाथ में है हम वही कर सकते हैं। ईश्वर की मर्ज़ी के आगे झुकना ही होगा।हम उससे शिकायत नहीं कर सकते।सकारात्मक विचारों से हमे अपने जीवन में शांति रखनी होगी।आशा है कि इन विचारों से आप सहमत होंगे। इस आशा के साथ कि सभी प्राणी सकारात्मक विचारों से अपने जीवन में शान्ति रखें, मिलते हैं जल्दी ही किसी अन्य जीवन उपयोगी विषय के साथ । तब तक के लिए खुश रहें, सकारात्मक रहें और ईश कृपा को नमन करें। धन्यवाद।ओम शान्ति। 

शनिवार, 30 मई 2026

जीवन में आज़ादी का महत्व

 


जीवन में आज़ादी का महत्व 

नमस्कार। मैं ज्योति कक्कड़ , Learn Till The End के नौवें एपिसोड के साथ एक बार फिर आपके सामने अपने विचार ले कर आई हूँ और आज जिस विषय पर मैं बात करूँगी उसका हमारे जीवन को खुशहाल बनाने में बहुत योगदान है।और वो है हमारे जीवन में आज़ादी मतलब हमारी व्यक्तिगत आज़ादी ।

मेरे विचार से मैं तब आज़ाद हूँ जब मैं वैसे जियूँ जैसे मैं चाहती हूँ। वो करूँ जो मैं करना चाहती हूँ। अपने निर्णय स्वयं ले सकूँ।उस छोटीसे छोटी बात के लिये निर्णय ले सकूँ जो मेरी दिनचर्या परमेरे जीवन पर असर डालती हैं।बहुत छोटी बातें जैसे आज मुझे कब सो कर उठना हैकब नहाना हैआज क्या पहनने का मन हैक्या खाने का मन हैघर पर रहने का मन है या कहीं जाने का मन है और सभी कोअपने मन की करके ही बहुत ख़ुशी मिलती है।मैंने देखा है कि किसी कारण से आप अपने मन का ना कर पाये। प्लान कुछ किया था पर किसी कारण से वो ना कर पाये तो मन थोड़ा खिन्न रहता हैं। कुछ अधूरा सा रहता है। छोटी छोटी बातों में जैसे इच्छा ना होते हुए भी किसी का निर्देश आपको मानना पड़ जाये तो इससे भी आप कुछ नाखुश सा महसूस करेंगे ,जब तक कि राय देने वाले से आपके संबंध इतने अच्छे ना हों कि आप दो लोग बात करके सहमति ना बना लें।

आपको लग रहा होगा कि इन छोटी छोटी बातों में आज़ादी की माँग ? जी हाँ ये छोटी बातें इतनी छोटी भी नहीं हैं। क्योंकि आप को चिड़चिड़ाहट कब होती हैग़ुस्सा कब आता है ? जब आप वो नहीं कर रहे जो आप करना चाहते हैं। मान लीजिए आप सो कर उठे और आपको कुछ देर यूँ ही अकेले बाहर अपने पौधों के साथ या बालकनी में उगते सूरज के सामने बैठने का मन है पर आपने अपने मन का ना करके घर के किसी बुजुर्गबच्चे या किसी भी और सदस्य के लिए नाश्ता बनाया क्योंकि इसकी ज़िम्मेदारी आपने ली हुई है। ज़िम्मेदारी आगे रख कर आपने अपने मन को पीछे कर दिया। अपनी ज़िम्मेदारी निभा कर आपको अच्छा लगा पर मन का जो ना किया वो कहीं अंदर दबा रह गया ।और उसने चिड़चिड़ाहट पैदा की क्योंकि आप अपने लिए समय नहीं निकल पाये। यहाँ काम आता है समन्वय बैठाना।क्योंकि आप वो भी नहीं जो अपनी ज़िम्मेदारी को पीछे रख कर खुश हो जायेंगी। सबके लिए कर के जो ख़ुशी मिलती है वो भीआप खोना नहीं चाहती। उसको निभा कर भी आपको आत्मसंतुष्टि मिलती है  तब एक ही उपाय है कि जब दोनों ही कार्यों में आत्मसंतुष्टि मिलती है तो वो पहले किया जाये जिसके लिए समय नहीं रुकेगा ।थोड़ा जल्दी उठ कर उगते सूरज के सामने बैठ करपौधों को निहार कर ,ईश्वर से मन की बात कर के तब दिनचर्या शुरू करी जाये। क्योंकि अपने मन का करके आपने अच्छी ऊर्जा पा ली है। आपने दिन की शुरुआत अच्छे ढंग से की है।

अब आगे भी पूरा दिन आपको आज़ादी के साथ जीना है  ज़िम्मेदारी निभानी है पर आज़ादी के साथ। ये पौधा घर के अंदर रखना है या सीढी में। ये कितनी छोटी बात है। पर अगर आपके मन ने कहा कि ये पौधा इस कोने में रखने से मेरी आँखों को अच्छा लग रहा हैइस कोने में जान  गई है तो वहाँ रख दीजिए। उसको देख कर आपको दिन भर ख़ुशी मिलेगी ।पर किसी के ये कहने पर कि पौधा अंदर रखने से मच्छर आएगा और आपने उसकी बात मान कर पौधा बाहर रख दिया तो वो सूना कोना आपको दिन भर खटकेगा। बहुत छोटी सी बात है पर छोटी छोटी चीज़ें जीवन में बहुत ख़ुशियाँ लाती हैं। जब जो करना है ,जैसे करना है यही आज़ादी है ।जीवन को मस्त होकर जीना ही असली जीना है  पर आपकी मस्ती से किसी की आज़ादी में ख़लल ना पड़े इसका भी ध्यान रखना चाहिए।अपनी आज़ादी भी तभी अच्छी लगती है जब दूसरों को उससे कष्ट ना हो।इसलिए जियो और जीने दो का सबक़ हमेशा याद रखें  ऐसे छोटे छोटे सबक़ learn till the end आपसे साझा करता रहेगा। तब तक के लिए नमस्कार।