जीवन में आज़ादी का महत्व ।
आज जिस विषय पर मैं बात करूँगी उसका आपके जीवन को खुशहाल बनाने में बहुत योगदान है।और वो है जीवन में आज़ादी ।
आज़ादी का क्या मतलब है?
मेरे विचार से मैं तब आज़ाद हूँ जब मैं वैसे जियूँ जैसे मैं चाहती हूँ। वो करूँ जो मैं करना चाहती हूँ। अपने निर्णय स्वयं ले सकूँ।उस छोटीसे छोटी बात के लिये निर्णय ले सकूँ जो मेरी दिनचर्या पर, मेरे जीवन पर असर डालती हैं।बहुत छोटी बातें जैसे आज मुझे कब सो करउठना है, कब नहाना है, आज क्या पहनने का मन है, क्या खाने का मन है? घर पर रहने का मन है या कहीं जाने का मन है और अपने मनकी करके ही बहुत ख़ुशी मिलती है।मैंने देखा है कि किसी कारण से आप अपने मन का कर पाये। प्लान कुछ किया था पर किसीकारण से वो ना कर पाये तो मन थोड़ा खिन्न रहता हैं। कुछ अधूरा सा रहता है। छोटी छोटी बातों में किसी की टोका टाकी या इच्छा नाहोते हुए भी किसी का निर्देश आपको मानना पड़ जाये तो इससे भी आपका दिन, आपका मूड ख़राब हो सकता है या कुछ नाखुश सामहसूस करेंगे ,जब तक कि राय देने वाले से आपके संबंध इतने अच्छे ना हों कि आप दो लोग बात करके सहमति ना बना लें।
आपको लग रहा होगा कि इन छोटी छोटी बातों में आज़ादी की माँग ? जी हाँ ये छोटी बातें इतनी छोटी भी नहीं हैं। क्योंकि आप कोचिड़चिड़ाहट कब होती है, ग़ुस्सा कब आता है ? जब आप वो नहीं कर रहे जो आप करना चाहते हैं। मान लीजिए आप सो कर उठे औरआपको कुछ देर यूँ ही अकेले बाहर अपने पौधों के साथ या बालकनी में उगते सूरज के सामने बैठने का मन है पर आपने अपने मन का नाकरके घर के किसी बुजुर्ग, बच्चे या किसी भी और सदस्य के लिए नाश्ता बनाया क्योंकि इसकी ज़िम्मेदारी आपने ली हुई है। ज़िम्मेदारीआगे रख कर आपने अपने मन को पीछे कर दिया। अपनी ज़िम्मेदारी निभा कर आपको अच्छा लगा पर मन का जो ना किया वो कहींअंदर दबा रह गया ।और उसने चिड़चिड़ाहट पैदा की क्योंकि आप अपने लिए समय नहीं निकल पाये। यहाँ काम आता है समन्वयबैठाना।क्योंकि आप वो भी नहीं जो अपनी ज़िम्मेदारी को पीछे रख कर खुश हो जायेंगी। सबके लिए कर के जो ख़ुशी मिलती है वो भीआप खोना नहीं चाहती। उसको निभा कर भी आपको आत्मसंतुष्टि मिलती है । तब एक ही उपाय है कि जब दोनों ही कार्यों में आत्मसंतुष्टि मिलती है तो वो पहले किया जाये जिसके लिए समय नहीं रुकेगा ।थोड़ा जल्दी उठ कर उगते सूरज के सामने बैठ कर, पौधों कोनिहार कर ,ईश्वर से मन की बात कर के तब दिनचर्या शुरू कि जाये। क्योंकि अपने मन का करके आपने अच्छी ऊर्जा पा ली है। आपनेदिन की शुरुआत अच्छे ढंग से की है।
अब आगे भी पूरा दिन आपको आज़ादी के साथ जीना है । ज़िम्मेदारी निभानी है पर आज़ादी के साथ। ये पौधा घर के अंदर रखना है यासीढी में। ये कितनी छोटी बात है। पर अगर आपके मन ने कहा कि ये पौधा इस कोने में रखने से मेरी आँखों को अच्छा लग रहा है, इसकोने में जान आ गई है तो वहाँ रख दीजिए। उसको देख कर आपको दिन भर ख़ुशी मिलेगी ।पर किसी के ये कहने पर कि पौधा अंदररखने से मच्छर आएगा और आपने उसकी बात मान कर पौधा बाहर रख दिया तो वो सूना कोना आपको दिन भर खटकेगा। बहुत छोटीसी बात है पर छोटी छोटी चीज़ें जीवन में बहुत ख़ुशियाँ लाती हैं। जब जो करना है ,जैसे करना है यही आज़ादी है ।जीवन को मस्त होकर जीना ही असली जीना है । पर आपकी मस्ती से किसी की आज़ादी में ख़लल ना पड़े इसका भी ध्यान रखना चाहिए।अपनी आज़ादीभी तभी अच्छी लगती है जब दूसरों को उससे कष्ट ना हो।इसलिए जीयो और जीने दो का सबक़ हमेशा याद रखें ।
