ईश्वर ने संसार बहुत सुंदर बनाया है।आसमान की तरफ़ उगते सूरज को देखो। आप ईश्वर का आशीर्वाद अनुभव करेंगे। सुबह कीताज़ी हवा,तरह तरह की चिड़ियों की आवाज़ें, लहराते पेड़ सब कुछ तो बहुत अच्छा है फिर इंसान का दिमाग़ और दिल इतनाकॉम्प्लिकेटेड क्यों बनाया।अगर ये सही काम कर रहे हैं तो सब तरफ़ ईश कृपा अनुभव होती है, ये दुनिया, ये हमारा जीवन सब कुछआनंद दायक अनुभव होता है। पर ये इंसान अपनी बुरी सोच , छोटी बुद्धि कड़वी बोली या करमों से इसी अपने जीवन में, आसपासके लोगों में नकारात्मकता भर देता है और तब कुछ भी सुन्दर नहीं दिखता।वही हरियाली, वही सूर्योदय, वही घर सब का सुख आपअनुभव नहीं करते क्योंकि आपका मन कुछ भी सही नहीं सोच रहा ।दिल दिमाग़ नकारात्मकतासे भरे हैं।अच्छे विचार जाने कहाँ गये।आप अपने विचारों को झटकते हैं पर वो कहीं नहीं जाते ।आपके मन की शांति , खुश मिज़ाजी कहीं चली गई।
ध्यान लगाने की कोशिश करें पर नकारात्मक सोच आपको ये भी नहीं करने देती।कहते हैं विचार आने दो, जाने दो और फिर विचारशून्य हो जाओ ।पर जब आप नकारात्मक सोच में हैं तो विचार आ रहे हैं ,जा नहीं रहे। और जो आ रहे हैं वो आपको अशांति दे रहे हैं।कहते हैं ध्यान की चरम अवस्था आपको विचार शून्य कर देती है पर वो तभी होगा जब आप शांत अवस्था में हों। ध्यान में आप केवलईश कृपा को महसूस करें । जो जीवन में मिला है ,सुख या दुख या कठिन परिस्थिति उसका धैर्य से सामना करना है।ईश्वर से उस कठिन परिस्थिति का सामना करने की हिम्मत माँगिये।आपा खोने से कुछ समाधान नहीं निकलेगा ।केवल जो आपके हाथ में है आपवही कर सकते हैं। ईश्वर की मर्ज़ी के आगे झुकना ही होगा।आप उससे शिकायत नहीं कर सकते।
